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बैंकों से मिलने वाली मुफ्त सेवाओं पर संकट, ग्राहकों को पर बोझ आ सकता है

केंद्र सरकार ने खाते में न्यूनतम जमा (मिनिमम बैलेंस) रखने वाले ग्राहकों को दी जाने वाली मुफ्त सेवाओं पर 19 बैंकों से 15 हजार करोड़ रुपये टैक्स मांगा है। इससे बैंक ग्राहकों को दी जाने वाली मुफ्त सेवाओं पर संकट मंडरा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों को अगर कर देना पड़ा तो वे इसका बोझ ग्राहकों पर भी डाल सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बैंकों से पिछले पांच साल में इन सेवाओं पर टैक्स देनदारी का हिसाब लगाकर बैंकों से इसे चुकता करने को कहा है। इसमें ब्याज और जुर्माने को जोड़ दें तो कर देनदारी 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। रिपोर्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इसमें इसमें एचडीएफसी बैंक पर 6500 करोड़, आईसीआईसीआई पर 3500 और एक्सिस बैंक पर 2500 करोड़ की देनदारी बनती है, जो ब्याज और जुर्माने को छोड़कर है।
एसबीआई, यस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक पर भी 1000-1000 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है। बैंक ग्राहकों द्वारा मिनिमम बैलैंस बनाए रखने की एवज में ये मुफ्त सेवाएं ग्राहकों को देते हैं और इन पर कोई जीएसटी नहीं लगता है। वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय ने जून में भी तमाम बैंकों को नोटिस दिया था। तब सरकार ने कहा था कि इन सेवाओं पर कोई टैक्स नहीं बनता है, लेकिन इस ताजा नोटिस से यह मामला फिर उभर आया है। यह नोटिस बैंकों को एक माह पहले थमाया गया है।
सीधे कुछ न कहते हुए एक्सिस बैंक के प्रवक्ता ने कहा है कि कर एजेंसियों की ओर से कुछ ब्योरा मांगा गया है और उनसे पूरा सहयोग किया जा रहा है। हालांकि एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के अप्रत्यक्ष कर साझेदार सुमित लुंकर ने कहा कि इन सेवाओं पर टैक्स की मांग का कोई औचित्य नहीं है। जानकारों का कहना है कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के चेयरमैन वीजी कन्नन ने कहा कि वह सरकार मुफ्त सेवाओं पर टैक्स न लगाने का अनुरोध करेंगे।
नोटिस के अनुसार, टैक्स की गणना बैंक द्वारा मिनिमम बैलेंस न रखने पर वसूले जाने वाले जुर्माने के आधार पर तय की गई है। अगर 1000 रुपये का मिनिमम बैलेंस न रखने पर जुर्माना 100 रुपये है तो जुर्माने की रकम पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। इस तरह मुफ्त सेवा की कीमत 100 रुपये तय की गई है।
बैंक मुफ्त सेवाओं पर लगा सकते हैं शुल्क
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बैंकों को यह टैक्स देना पड़ता है तो वे मुफ्त सेवा बंद कर इस पर कुछ शुल्क लगा सकते हैं, इससे ग्राहकों पर बोझ बढ़ेगा। पीडब्ल्यूसी इंडिया के लुंकर ने कहा कि यह मिनिमम बैलेंस बनाए रखने वाले ग्राहकों से नाइंसाफी होगी, क्योंकि उन्हें ऐसा न करने वाले ग्राहकों की तरह शुल्क देना होगा। उन्होंने कहा कि यह आम आदमी को बैंकिंग चैनल के इस्तेमाल के प्रति हतोत्साहित करेगा और उपभोक्ता मिनिमम बैलेंस बनाए रखने को प्राथमिकता नहीं देंगे।

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