अमृतसर रेल हादसा : दशहरा कार्यक्रम देख रहे लोगों को ट्रेन ने रौंदा, 10 सेंकेड में 61 की मौत 72 घायल

जोड़ा फाटक पर दर्दनाक हादसा देख लोगों का बुरा हाल था। जिनके घरों के चिराग नहीं मिल रहे थे उनका रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था। जिन्हें अनहोनी का डर सता रहा था वह पागलों की तरह रेल पटरियों पर दौड़ रहे थे। घटनास्थल पर पड़े शवों से कपड़ों के टुकड़े उठाकर अपने वारिसों की पहचान करने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन तेज रफ्तार ट्रेन के पहियों तले बुरी तरह से कुचले गए शरीर परिजन तो क्या किसी से पहचान नहीं जा रहे थे। रात के अंधेरे में किसी का सिर नहीं मिल रहा था, तो किसी का हाथ। मृतकों के अंग तलाशने में परिजनों को काफी मुश्किल हो रही थी क्योंकि तेज रफ्तार डीएमयू काफी दूर तक लोगों को घसीटते हुए ले गई थी।
एक मां अपने गुल्लू को तलाशते हुए कभी रो पड़ती तो कभी हंस पड़ती। एक पल के लिए उसे लगता कि रावण तो जल गया और उसका गुल्ल कुछ ही देर में घर पहुंच रहा होगा, यह कहकर वह हंस पड़ती। वहीं दूसरे पल वह रो पड़ती और कहने लगती कि वह घर बोल कर गया था कि ट्रेन ट्रैक के पास रुक कर जलता रावण देख लेगा। कभी उसे आसपास के लोग समझाते कि वह घर चली जाए, लेकिन वह नहीं जा रही थी क्योंकि उसे अपने गुल्लू की तलाश थी। गुल्लू उसे देर रात तक कहीं नहीं मिला।
किसी का सिर नहीं, तो किसी के हाथ-पैर नहीं,घटनास्थल पर पड़े शवों से कपड़ों के टुकड़े उठा कर रहे थे पहचान
जोड़ा फाटक में हादसे के बाद 150 से ज्यादा खून से लथपथ हुए लोग रेल ट्रैक और उसके आसपास पड़े पत्थरों पर बुरी तरह से तड़प रहे थे। ट्रैक के आसपास स्थित घरों की छतों पर मौजूद लोगों ने तुरंत प्रशासन को घटना की जानकारी दी। देखते ही देखते सारे शहर की एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंच गईं। अस्पतालों में हूटर बजाती एंबुलेंस आती रहीं और जाती रहीं। एंबुलेंसों में एक-एक कर शव उतारे जाते। क्षत-विक्षत शवों को देखकर डॉक्टर भी विचलित हो गए।
मिला जिंदगी भर का गम…
दशहरा देखने पोता चुपचाप निकल गया था, उसकी लाश मिली
हादसे में अपना 15 वर्षीय पोता गंवा चुके तरसेम सिंह ने बताया कि पोता सुबह से जिद कर रहा था कि मैं दशहरा देखने जाऊंगा। मैं उसे मना कर रहा था, पर चार बजे वह चुपचाप घर से निकल गया। शाम साढ़े सात बजे मुझे पता चला कि रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के नीचे आकर लोग दब गए हैं। मैं डर गया। मैैं दौड़े-दौड़े रेलवे ट्रैक पर पहुंचा तो वहां पोते की लाश मिली।
जो बच गए…
आंखों के सामने पड़ी थीं क्षत-विक्षत लाशें
सिविल अस्पताल में दाखिल मोनिका ने बताया कि पटाखों का शोर सुनकर लोग भागने लगे। मैं भी उनके साथ भागी। इसके बाद मेरी कमर पर जोरदार टक्कर लगी और मैं पटरी के दूसरी साइड गिर गई। उठकर देखा तो मेरे पास एक व्यक्ति का कटा हुआ हाथ पड़ा था। चारों तरफ क्षत-विक्षत लाशें बिखरी थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी…
जब तक लोग कुछ समझ पाते, चीख-पुकार मच गई
एक प्रत्यक्षदर्शी राकेश कुमार ने बताया कि लोग रेलवे ट्रैक और उसके आसपास छतों पर चढ़कर दशहरा देख रहे थे। रावण के पुतले को आग लगते ही चारों तरफ पटाखों की गडगड़़ाहट होने लगी। उसी दौरान अमृतसर से हावड़ा जाने वाली ट्रेन जोड़ा फाटक के पास पहुंच गई। लोग बीच वाले ट्रैक से हटकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गए। तभी जालंधर से अमृतसर की तरफ तेज रफ्तार डीएमयू पहुंच गई। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, वे ट्रेन की चपेट में आ गए और चीख-पुकार मच गई।
दो लड़कों को बचाया, तभी 25-30 लाशें बिछ गईं
प्रत्यक्षदर्शी गुरजिंदर ने बताया कि रावण के पुतले को आग लगाने के बाद पटाखे बज रहे थे। तभी अचानक ट्रेन आ गई जिसकी आवाज किसी को सुनाई नहीं दी। मैंने दो लड़कों का हाथ पकड़ खींचकर बचाया। तब तक देखा कि 25-30 लोगों की लाशें बिछ गई हैं। लाशों को दूसरी जगह पहुंचाने में मेरे हाथ पूरे खून से सन गए। उनमें कई मेरे जान-पहचान के थे।
ट्रेन ने कोई हॉर्न नहीं दिया
मौके पर मौजूद हरदयाल ने बताया कि ट्रेन बहुत स्पीड में आई और कोई हॉर्न नहीं दिया। ट्रैक पर जो भी थे सभी कुचले गए। स्टेज से कहा गया था कि लोग पटरी से दूर होकर खड़े रहें। ये आयोजन हर साल होता है।
उधर, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा- रेलवे की कोई गलती नहीं, स्‍थानीय प्रशासन जिम्‍मेदार
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी व अन्‍य अफसर शुक्रवार रात हादसा स्‍थल पर जांच करते हुए।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने कहा है कि अमृतसर दुर्घटना पर बयान। रेलवे की कोई गलती नहीं। इसके लिए स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार। ड्राइवर ने ब्रेक लगाए थे लेकिन ट्रेन अपनी निर्धारित स्पीड से थोड़ा धीमी हुई। ट्रैक पर किसी की मौजूदगी के लिए वह व्यक्ति खुद जिम्मेदार है और इस बारे में कानून स्पष्ट है। रेलवे को प्रशासन की ओर से इस कार्यक्रम के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई।
“ड्राइवर ने स्पीड कम की थी, अगर इमरजेंसी ब्रेक लगाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। वहां अंधेरा था, ट्रैक थोड़ा मुड़ाव में था इसलिए ड्राइवर को ट्रैक पर बैठे लोग नज़र नहीं आए। गेटमैन की ज़िम्मेदारी सिर्फ गेट की होती है। हादसा इंटरमीडिएट सेक्शन पर हुआ। जो कि एक गेट से 400 मीटर दूर है, वहीं दूसरे गेट से 1 किलोमीटर दूर है।

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