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SC-ST Act के विरोध में आज भारत बंद

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से SC-ST Act में संसोधन से सवर्ण नाराज़ हो गए हैं। और आज सवर्णों ने भारत बंद का एलान किया है। इसके दौरान प्रशासन भी अपनी तैयारियां कर ली है। समिति ने मंगलवार को हुई एक सभा में यह फैसला लिया है और साधु-संत भी इसे समर्थन दे रहे हैं। सवर्ण समाज संघर्ष समिति का कहना है कि केंद्र सरकार जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है और इसलिए ऐसा किया जा रहा है लेकिन हम उनके इन मंसूबो को पूरा नहीं होने देंगे। साथ ही मध्य प्रदेश के 6 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं बंद का असर मध्य प्रदेश में साफ़ दिखाई दे रहा है।
– भारत बंद के कारण भोपाल में पेट्रोल पंप आज सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बंद किए गए।
– लखनऊ और राजस्थान में SC/ST (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम संशोधन के खिलाफ विभिन्न संगठनों हो रहे विरोध के कारण दुकानें बंद।
– भारत बन्ध विरोध के चलते ग्वालियर में निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। एसडीएम नरोत्तम भार्गवी कहते हैं, “बहुत से सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। हम किसी भी तरह की स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
– धारा 144 कई जगहों पर लगाया गया। फिलहाल यह बहुत शांतिपूर्ण है।
– भारतबंध विरोध प्रदर्शन के दौरान बिहार में विरोधियों ने मोकामा और ब्लॉक रोड आगजनी।
– महाराष्ट्र में भी हो रहा है SC/ST (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम में संशोधन के खिलाफ विरोध।
ग्वालियर, भिंड, मुरैना समेत 10 जिलों में धारा-144 लागू कर दिया गया है। गौरतलब है कि 2 अप्रैल को दलितों के बंद के दौरान इन इलाकों में भारी हिंसा हुई थी। बिहार के लखीसराय जिले में लोगों ने NH-80 को जाम कर दिया है तो वहीं छपरा में सवर्णों ने NH-19 पर जाम लगा दिया है। बड़ी संख्या में लोग मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर सड़कों पर उतरे हैं। आरा रेलवे स्टेशन पर लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन को रोका गया। आंदोलनकारियों जमकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि SC/ST कानून में जल्द बदलाव नहीं किया गया तो इससे भी बड़ा आंदोलन देश में होगा।
मध्य प्रदेश प्रशासन पहले से ही सतर्क है। इसी मद्देनजर राज्य के भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना, अशोक नगर, छतरपुर में धारा 144 लगा दी गई है। आपको बता दें, इस साल मार्च में महाराष्‍ट्र के एक सरकारी अधिकारी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-जनजाति(SC-ST Act) के खिलाफ अत्‍याचार निवारण कानून के सख्‍त प्रावधानों को नरम किया था। कोर्ट ने कहा था, इस श्रेणी के आरोपी की गिरफ्तारी शुरुआती जांच या वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति के बाद ही होगी। पहले इसमें तत्‍काल गिरफ्तारी का प्रावधान था। इस फैसले के बाद देश में एससी-एसटी संगठनों ने आंदोलन किया।
नतीजतन केंद्र सरकार ने मानसून सत्र में अध्‍यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया। अब वह पुराने स्‍वरूप में फिर से लागू हो गया है। इस पर दलित संगठनों ने तो संतोष व्‍यक्‍त किया लेकिन सवर्ण समाज के कई तबकों में इसका विरोध शुरू हो गया है। जिसके चलते 6 सितंंबर यानी गुरुवार को सवर्ण समाज संघर्ष समिति द्वारा राजस्थान बंद का ऐलान किया गया है और इसमें राजपूत समाज, वैश्य सभा, गुर्जर महासभा, परशुराम सेना, ब्रह्मण महासभा सहित कई समाजों के पदाधिकारी और प्रतिनिधी शामिल होंगे।

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