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ट्रंप का महाभियोग और भारत की भूमिका

 देश – विदेश (Did News ) ; अमेरिकी राजनीति में दो बार महाभियोग प्रस्ताव लाए गए, दोनों में सत्तापक्ष की हार हुई और विपक्ष अपने मकसद में कामयाब हुआ। अब, तीसरा महाभियोग मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर लाया गया है। यह बात सच है कि राजनीति चाहें देशी हो या विदेशी उसमें तय किए गए औहदे स्थाई नहीं होते? सियासी तूफान जब आता है तो अपने साथ बहा ले जाता है। दुनिया के प्रचंड शक्तिशाली मुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी कुछ ऐसा ही होने वाला है, ऐसा अंदेशा है। उनपर महाभियोग लाया जा रहा है। शायद जिसकी उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की होगी। डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पास हो चुका है। महाभियोग के पास होते ही उनकी सियासी जमीन नीचे खिसकने लगी है। राष्ट्रपति पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए राष्ट्रपति पद का बेजा इस्तेमाल किया। दुरूपयोग करने का आरोप लगा है हालांकि इससे निपटने के लिए वह तिगड़म भिड़ा रहे हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महाभियोग प्रस्ताव की लड़ाई को जीतने के लिए अपने मित्र देशों जैसे भारत से भी उम्मीद लगाए हैं। दरअसल, कुछ सीनेट सदस्य ऐसे भी होते हैं जो दूसरे अन्य देशों की तरफ झुकाव रखते हैं। अमेरिका में कुछ सांसद ऐसे हैं जो भारतवंशी हैं। इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप को उम्मीद है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती ऐसे मौके पर काम आएगी। अमेरिकी महाभियोग भी भारतीय अविश्वास प्रस्ताव की तरह होता है। भारतीय संसद में जब किसी सरकार के खिलाफ ऐसा होता है तो हुकूमत के मुखिया और उनके करीबी लोग बचाने के लिए हर जुगत में लग जाते हैं। कमोबेश, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं। लेकिन वहां खुलेआम सांसदों की खरीद-फरोख्त नहीं होती। सबकुछ कायदे-कानूनों के मुताबिक किया जाता है। जो भी सांसद ऐसी किसी गतिविधियों में पाया जाता है उसे मतदान से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। ऐसे मौकों पर सदस्यों को अपने पसंद की स्वतंत्रता दी जाती है।

अमेरिकी महाभियोग के इतिहास की बात करें तो इससे पहले दो मर्तबा अलग-अलग राष्ट्रपतियों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव सिनेट में लाए गए जिसमें दोनों में हार हुई थी। पूर्व राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन और बिल क्लिंटन के खिलाफ भी महाभियोग प्रस्ताव पास हुआ था। डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के तीसरे ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो महाभियोग प्रस्ताव का सामना कर रहे हैं। उनको इस बात का कहीं न कहीं डर जरूर है कि उनके साथ भी पुनरावर्ति न हो जाए। राष्ट्रपति ट्रंप पर फिलहाल पहले पायदान हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में प्रस्ताव पास हुआ है। अब यह प्रस्ताव सीनेट में जाएगा। वहां उनपर लगे सभी आरोपों का बिंदुवार तरीके से एक-एक करके ट्रायल किया जाएगा। जब ट्रायल प्रक्रिया पूरी होगी। तब सीनेट में सभी संसद सदस्यों द्वारा मतदान कराया जाएगा। मतदान में अगर प्रस्ताव गिर गया, तो उनकी कुर्सी बची रहेगी। पर, खुदा न खास्ता प्रस्ताव नहीं गिरा तो कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा। उसके बाद उनकी कुर्सी को उप-राष्ट्रपति के अधीन हो जाएगी। सीनेट सदस्यों और उनके नंबरों पर गौर करें तो इस वक्त कुल 100 सदस्य हैं, इनमें से 53 सदस्य रिपब्लिकन पार्टी के हैं। 45 डेमोक्रेट्स पार्टी के और दो सदस्य निर्दलीयों की भूमिका में हैं।

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