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नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की हुई पूजा

नवरात्र के तीसरे दिन भक्तों ने मां चंद्रघंटा की उपासना की। माता से शांति और कल्याण की कामना की गई। देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। जयकारे करते काफी संख्या में नंगे पैर ही भक्त मंदिरों की ओर भागते नजर आए। घरों में भी पूजा अर्चना का सिलसिला जारी है।  तपेश्वरी, बारादेवी, चंद्रिकादेवी, बंगाली मोहाल स्थित कालीदेवी समेत शहर के प्रमुख मंदिरों में बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन संस्कार की धूम मची है। तपेश्वरी मंदिर में कल्याणपुर से बैंड बाजे के साथ सात साल के बच्चे उन्नयन का मुंडन कराने आया परिवार खुश नजर आया। उन्नयन के पिता राजीव ने बताया किउनके यहां इस मंदिर में मुंडन संस्कार कराने की परंपरा है।मां चंद्रघंटा कल्याण और शक्ति की देवी मानी जाती हैं। साधकों ने देर रात तक मां के विग्रह को साधना कर मनाया। बिरहानारोड स्थित तपेश्वरी मंदिर में तड़के से ही महिलाएं समूह में नंगे पैर दर्शन करने पहुंचीं। जय मातादी के घोष के बीच भक्तों ने पंक्ति में लगकर माता के दर्शन किए। जूही स्थित बारादेवी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है। महिलाओं की टोलियां देवी गीत गातें हुए पहुंचीं। देर रात तक मां के जयकारे गूंजते रहे। सारी जगत मैं घूम आई , मैया जैसा दरबार कहां…, मां मुरादे पूरी *कर दे हलुवा बाटूंगी…,द्वारे तुम्हारे बढ़ी भीड़ हो जगदम्बे मैया…गीत पर भक्त मगन हो गए।

साधक जाप में जुटे : हटिया स्थित बुद्धादेवी, डिप्टीपड़ाव स्थित चंद्रिका देवी, किदवईनगर स्थित जंगलीदेवी, दबौली, गोविंदनगर स्थित दुर्गा मंदिर में देर रात तक मां की पूजा अर्चना हुई। गंगापुल पार कर शुक्लागंज स्थित दुर्गा मंदिर में भी शहर के काफी संख्या में माता के भक्त पहुंचे। 

मंदिरों में बधाई गीत गाने वाली महिलाएं भी खूब न्योछावर ले रही है। कई बुजुर्ग महिलाएं बच्चों का मुंडन या कर्ण छेदन होने के दौरान गीत गुनगुना रही है। बारादेवी और तपेश्वरी मंदिर के मेले में रौनक लगातार बढ़ती जा रही है।

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