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मां दुर्गा के पट खुले, पूजन – दर्शन को लगी रही श्रद्धालुओं की भीड़

या देवी सर्वभूतेषु…नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमो नम:…रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि…ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै…वैदिक मंत्रोच्चार और दुर्गासप्तशती के पाठ के बीच शुक्रवार को मंदिरों में मां दुर्गा के पट दर्शन के लिए खोल दिए गए। पट खुलने के साथ ही मां के भव्य रूप के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में दर्शन और पूजन के लिए दोपहर बाद तक श्रद्धालु पहुंचते रहे। 

मंदिरों में इसके पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बेल तोड़ी पूजा की जाएगी। इसके बाद पत्रिका प्रवेश पूजा के साथ मां के पट दर्शन के लिए खोले गए। लोदीपुर चौराहा पर मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा के पट भी पूजन के बाद दर्शन को खोल दिए गए। मंदिरों और पंडाल में मां दुर्गा के सातवें और आठवें स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी। पूजन के बाद भव्य आरती हुई। मंदिरों, शक्तिस्थलों और सनातन धर्मावलंबियों के घरों से दुर्गसप्तशती के श्लोकों,देवी गीत, भजन से शहर भक्तिमय रहा। धूप, दीप, गुगुल, अगरबत्ती की सुगंध से वातावरण सुवासित होता रहा। सिद्धेश्वरी काली मंदिर बांसघाट में मुख्य पुजारी पं.संजय कुमार तिवारी शशिबाबा के नेतृत्व में मां की पूजा हुई। वहीं रात साढ़े दस बजे से निशा पूजा की गयी। दरभंगा हाऊस काली मंदिर,गोलघर अखंडवासिनी मंदिर, मनोकामना शिव मंदिर बैंकमेंस कॉलोनी सहित तमाम मंदिरों में और शक्तिस्थलों पर मां दुर्गा की भव्य पूजा की गयी। 
मंदिरों में शनिवार को संधिपूजा और नवमी पूजन होगा। बांसघाट काली मंदिर में सुबह 8 से 9 बजे तक संधि पूजा, ढाई से पांच बजे हवन और उसके बाद कुमारी पूजन-भोजन होगा
आचार्य राजनाथ झा के अनुसार शनिवार को महाष्टमी और महानवमी पूजा होगी। अरसे बाद महाष्टमी,महानवमी और रामनवमी का शुभ संयोग इस शनिवार को बना है। यह पूजन अतिफलदायी रहेगी। उनके अनुसार शनिवार को श्रद्धालु दुर्गा की महाष्टमी का व्रत रखेंगे। हालांकि पंचांगों और पंडितों में मतैक्य नहीं रहने से शुक्रवार को भी श्रद्धालुओं ने महाष्टमी का व्रत रखा। पंडित संजय तिवारी शशिबाबा ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 8.15 बजे से ही अष्टमी शुरू था इसलिए शुक्रवार को ही महाष्टमी पूजन,व्रत किया गया। मान्यता है कि महाष्टमी का व्रत रखने से पूरे नवरात्र के नौ दिनों के व्रत के समान फल की प्राप्ति होती है। इसलिए जो श्रद्धालु नवरात्र का व्रत नहीं रखे हैं वे भी चाहें तो महाष्टमी का व्रत करके पूरे नवरात्र के समान व्रत का फल पा सकते हैं।

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