इंसान की आवाज की नकल कैसे कर लेता है तोता?

नई दिल्ली, (इंडिया साइंस वायर): यह तो सभी जानते हैं कि तोते इन्सानों की भाषा की नकल कर सकते हैं। लेकिन, वे ऐसा कैसे कर पाते हैं इस बात को लेकर वैज्ञानिक हमेशा जानने के लिए उत्सुक रहे हैं। पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कई तरह के ध्वनि संकेतों का उपयोग करती हैं। भारतीय शोधकर्ताओं के एक ताजा अध्ययन में तोते और कौए जैसे पक्षियों द्वारा ध्वनियों के अनुकरण की क्षमता की तुलना मनुष्यों के साथ करने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य उभरकर आए हैं।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, मनुष्य, कौए तथा तोते के स्वर तंत्र में कार्डिनल स्वरों का स्थान अलग-अलग होता है। इसका अर्थ है कि ये तीनों जीव उच्चारण के लिए अलग-अलग धवन्यात्मक क्षेत्रों का उपयोग करते हैं। लेकिन, इनके धवन्यात्मक क्षेत्रों का आकार समान होता है। मनुष्यों में कार्डिनल स्वर स्थानों के बीच की दूरी तोते और कौओं की तुलना में अधिक पायी गई है। जबकि तोते में कार्डिनल स्वर स्थानों ‘आई’ एवं ‘यू’ के बीच की दूरी सबसे कम पायी गई है।”
कपूरथला स्थित आई.के. गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, गुरदासपुर स्थित बेअंत कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी और जम्मू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा कार्डिनल स्वरों ‘ए’, ‘आई’ एवं ‘यू’ को केंद्र में रखकर यह अध्ययन किया गया है। इसमें ध्वनियों की नकल करने की तोते और कौए की क्षमता की तुलना मनुष्य के साथ की गई है। शोधकर्ताओं ने कॉमसोल मल्टीफिजिक्स नामक एक खास सॉफ्टवेयर का उपयोग इस अध्ययन में किया है। स्वर तंत्र के आकार अथवा उसके विभिन्न आयामों में होने वाले परिवर्तनों का परीक्षण कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से किया गया है।
इस अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता रणधीर सिंह ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “कार्डिनल स्वरों के लिए मानवीय स्वर तंत्र के आकार और क्षेत्र का अनुमान लगाने के लिए पूर्व अध्ययनों से मिले आंकड़ों का उपयोग किया गया है। मनुष्य की नकल करने के लिए कौए तथा तोते द्वारा अपनी जीभ में मॉड्युलेशन करने की क्षमता को केंद्र में रखकर उनके स्वर तंत्र की बनावट का आकलन करने की कोशिश की गई है। 100 से 5000 हर्ट्ज की आवृत्ति के दायरे में यह अध्ययन किया गया है।”
वैज्ञानिकों ने पाया है कि चोंच को छोड़कर पक्षियों के ध्वनि उत्पन्न करने वाले अंग मनुष्यों की तरह होते हैं। फेफड़े, श्वासनली, स्वर यंत्र, मुंह और चोंच पक्षियों के प्रमुख ध्वनि उत्पादक अंग होते हैं, जो उच्चारण में मदद करते हैं। तोते की रिंगरनेक तथा एलेक्जडरीन प्रजातियां और भूरे रंग के अफ्रीकी तोते समेत कौओं को अन्य जीवों की आवाज की नकल करने में सक्षम माना जाता है। तोते के ध्वनि उत्पन्न करने वाले अंग में मौजूद कंपक झिल्ली की बनावट अन्य पक्षियों की तुलना में जटिल नहीं होती है। तोते और मनुष्य की जीभ की सतह आकार में समान होती है। तोते विभिन्न प्रकार की ध्वनियों को पैदा करने के लिए अपनी जीभ में बदलाव कर सकते हैं।

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *