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खुशी लुटाते हैं त्यौहार

उपहारों की खुश्बू लेकर
जब-जब आ जाते त्यौहार
त्यौहारों का आना जैसे
टपटप टपटप माँ का प्यार

लेकिन सोचा तो यह जाना
सभी मनाते हैं त्यौहार
सबको ही प्यारे लगते हैं
माँ की गोदी से त्यौहार

जब लहलहाती हैं फसलें तो
खेत मनाते हैं त्यौहार
जब लद जाते फूल-फलों से
पेड मनाते हैं त्यौहार

पानी से भर जाती हैं तब
नदियों का होता त्यौहार
ठंड में मीठी धूप खिले तो
सूरज का होता त्यौहार

जिस दिन पेड नहीं कटते हैं
जंगल का होता है त्यौहार
और अगर मन अडिग रहे तो
पर्वत का होता है त्यौहार

अगर ना दुर्घटना हो कोई
सडक़ मनाती तब त्यौहार
मार काट ना चोरी हो तो
शहर मनाता है त्यौहार

दिल खोल कर खुशी लुटाते
कोई हो, सब पर त्यौहार
खिलखिल हँसते, खुशियाँ लाते
लेकिन लगते कम त्यौहार

अगर बीज इनके भी होते
खूब उगाते हम त्यौहार
खुश होकर तब उडते जैसे
पंछी उडते बाँध कतार

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