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छोटा चूहा

छोटा चूहा
नरम नरम सा
भूरा भूरा।
रेशम के धागों से जैसे
बुना हुआ सा।
मोती सी चमकीली आंखें
इसने मुझको काट लिया था।

शायद वो यह भूल गया था
यह भी तो
मेरे कमरे में ही
रहता है।
मेरी ही गुडियों के कपडे
और किताबें –
जातक कथा वेताल पचीसी
औ’ पश्चिम की लोक कथाएं
खा खा कर यह बडा हुआ है
और अभी भी विश्वकोष के
शब्दकोष के पन्नों को
कुतरा करता है
इसी तरह पला करता है।

मेरी नीली साडी क़ा कोना काटा है
नये ट्राउजर्स थे मेरे छेद कर दिया
मेरी नारंगी चुन्नी को
काट खा गया
ना जाने किस रोज शरारे की बारी है ?

जाने दो इतना छोटा है
माफ कर दिया।
तन का जब इतना छोटा है
कहां इसे होगा दिमाग
कि याद रख सके
कौन कहां किसकी चीजे हैं।
केवल अपना पेट पालना
सीख लिया है
लेकिन यह भी क्या कम है सुंदर लगता है।
मेरे लाल गलीचे पर
घूमा करता है।

घूम घूम कर मेरे बहुत उदास दिनों में
एकाकीपन का एहसास
हरा करता है।

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