धूप तौलिया

क्या वर्षा पर्वत की माँ है
क्या वह माँ पूरी धरती की
क्या वह सागर की भी माँ है
क्या वह माँ पेड-पौधों की
देख न माँ जैसे तू मुझको
प्यार प्यार से नहलाती है
वैसे ही तो माँ वर्षा भी
इन सबको हाँ नहलाती है
पर माँ इनके पास तौलिया
नहीं न फिर ये कैसे पोंछें
धूप तौलिया भी तो है ना
बस उससे ही ये सब पोंछें.

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