Breaking News

फूलों में

तुम भी देखो, हमने देखी
कविता फूलों में

सुबह सुबह जब कलियाँ खिलती
मजेदार जब खुशबू मिलती
जब बांछे हम सब की खिलती
हवा चले तो टहनी हिलती

जिधर देखते उधर फूल
ये झूलें झूलों में

तारों में भी कविता होती
कविता लहरों में भी होती
हममें होती तुममें होती
ढूंढो तो यादों में होती

यही नहीं कविता होती
बचपन की मीठी भूलों में

बादल में रिमझीली कविता
पर्वत पर बर्फीली कविता
झरनों में झरनीली कविता
बिजली में चमकीली कविता

अगर फूलों में होती कविता
तो होती है, शूलों में कविता

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *