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मेरा हाथी

कितना अच्छा है मेरा हाथी
मैं जू ज़ाकर उससे मिलता
मुझे देख खूब वह खिलता
जैसे हो मेरा ही साथी

दिन भर खाता है खूब
फिर सेकता जम कर धूप
रोटी,केले गन्ना उसको भाए

जो कोई जाए उसे खिलाए

पानी से नहाना उसका प्रिय शगल है
गणेश जी सी प्यारी उसकी शकल है
है मोटा ताजा खूब वो
कसरत का नाम लो तो कहता नो

इतना अच्छा मेरा हाथी
जैसे हो मेरा ही साथी

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