Breaking News

रेल चली

रेल चली खुशियों की, हमने
हंसकर जब दो बात कही।
चुन्नू, राजू, चंदू, श्याम
टीना, राशिद और कलाम,
छोड़-छाड़कर सारे काम
चलो खेल को दें अंजाम।
दौड़ पड़े हम, चिड़ियां चहकीं
ठंडी-ठंडी हवा बही।
तिल के लड्डू, चने-मटर
लें अपनी जेबों में भर,
भूख सताए हमें अगर
बैठें-खाएं मिल-जुलकर।
मटकी-हांडी खाली कर दें
पी जाएं सब दूध-दही।
लंगड़ी, खो-खो, गेंद-तड़ी
हुई खेलते देर बड़ी,
टिक-टिक-टिक-टिक करे घड़ी
समय दिखाए हमें छड़ी।
लेकिन अपने नन्हे मन में
भय-चिंता की जगह नहीं।

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *