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भगवान विष्णु, तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केंद्र

भगवान वेंकटेश्वर को विष्णु देव का अवतार माना जाता है। वेंकट पहाड़ी के स्वामी होने की वजह से भगवान विष्णु को वेंकटेश्वर कहते हैं। सात पहाड़ों का भगवान भी कहा जाता है भगवान विष्णु को। तिरुपति बालाजी मंदिर में साल के 12 महीनों में एक भी माह ऐसा नहीं गुजरता है कि जब भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने के लिए भक्तों की कतारें नहीं लगी हों। भगवान वेंकटेश स्वामी को संपूर्ण ब्रह्माण्ड का स्वामी माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर आन्धप्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में हैं। यह भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। तिरुपति बालाजी मंदिर के बारे में एक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां कुछ समय के लिए विश्राम किया था। तिरुमला के पुष्करणी नाम के तालाब के किनारे भगवान विष्णु ने निवास किया था। मंदिर के पास लगे हुए इस पुष्करणी पवित्र जलकुण्ड के पान का उपयोग सिर्फ मंदिर के पूजन और सेवाकार्यों जैसे कामों में किया जाता है। इस कुण्ड का पानी पूरी तरह से साफ और कीटाणुरहित है। भक्त इस कुण्ड के पवित्र जल में डुबकी भी लगाते हैं। कहा जाता है, कि भगवान विष्णु ने वैकुण्ठ में इसी कुण्ड में स्नान किया था। मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान से सारे पाप धुल जाते हैं, साथ ही सभी सुखों की प्राप्ति होती है। बगैर स्नान के इस मंदिर में कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है। कहा जाता है कि मंदिर का इतिहास 9वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है, जब कांचीपुरम के शासक वंश पल्लवों ने इस जगह पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था, लेकिन 15 वीं सदी के विजयनगर वंश के शासन के बाद भी इस मंदिर की ख्याति सीमित होती गई। 15 वीं सदी के बाद मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक जाने लगी। 1843 से 1933 ई. तक अंग्रेजों के शासन के तहत मंदिर का प्रबंधन हातीरामजी मठ के महंत ने संभाला। 1933 में इस मंदिर का प्रबंधन काम मद्रास की सरकार ने ले लिया। मंदिर की स्वतंत्र समिति तिरुमाला-तिरुपति मंदिर प्रबंधन का काम संभालती है।

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