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बर्थ डे स्पेशल : मशहूर कॉमेडियन महमूद की आज (29 सितंबर) 86वीं बर्थ एनिवर्सरी

1932 में आज ही के दिन पैदा हुए महमूद अब भी यादों और फिल्मों में जिंदा हैं। उन्होंने भूत बंगला, पड़ोसन, बॉम्बे टू गोवा, गुमनाम, कुंवारा बाप जैसी कई शानदार फिल्मों में काम किया। महमूद स्वभाव से थोड़े गुस्सैल थे। यही वजह थी कि एक बार उन्होंने उस दौर के सुपरस्टार राजेश खन्ना को सरेआम सेट पर थप्पड़ मार दिया था।
बात 1979 की है। दरअसल, महमूद ने अपनी फिल्म जनता हवलदार के लिए राजेश खन्ना को साइन किया था। राजेश खन्ना उस दौर में सुपरस्टार थे और उनका अलग ही स्टारडम था। महमूद अपने फार्म हाउस में फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग के दौरान एक दिन महमूद के बेटे ने राजेश खन्ना को देखा और सिर्फ हैलो बोलकर निकल गया। राजेश इस बात से बेहद नाराज हुए कि उसने उनसे बात तक नहीं की। इस घटना के बाद राजेश अक्सर सेट पर लेट आने लगे, जिससे शूटिंग में दिक्कत होने लगी। राजेश खन्ना की वजह से महमूद को घंटों इंतजार करना पड़ता था। महमूद डायरेक्टर के साथ फिल्म में एक्टिंग भी कर रहे थे। ऐसे में एक दिन राजेश खन्ना और महमूद में कुछ बहस हो गई तो उन्होंने सरेआम राजेश खन्ना को थप्पड़ जड़ दिया था। महमूद ने कहा था- आप सुपरस्टार होंगे अपने घर के…मैंने आपको फिल्म के लिए पूरा पैसा दिया है, इसलिए आपको फिल्म समय पर पूरी करनी पड़ेगी। इसके बाद राजेश खन्ना टाइम से आने लगे और फिल्म कम्प्लीट की।
बॉम्बे टू गोवा फिल्म से महमूद ने ही अमिताभ बच्चन को बड़ा ब्रेक दिया था। महमूद अमिताभ को बेटे की तरह मानते थे। लेकिन मरने के कुछ साल पहले महमूद और अमिताभ के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। दरअसल एक बार अमिताभ पिता हरिवंश राय को लेकर मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल गए थे। वहां पर महमूद भी एडमिट थे। तब उनकी बायपास सर्जरी हुई थी। महमूद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ये जानते हुए कि मैं वहां एडमिट हूं, अमिताभ मुझसे मिलने तक नहीं आए। अमिताभ ने बता दिया कि असली बाप ही असली होता है, मैं तो नकली था। खबरों के मुताबिक महमूद ने अमिताभ को एहसान फरामोश कहा था।
दादा मुनी यानी अशोक कुमार अपनी फिल्म किस्मत की शूटिंग कर रहे थे। उन्हें एक चाइल्ड आर्टिस्ट की जरूरत थी। चूंकि महमूद बचपन में खूब शैतानी करते थे। दादा मुनी की नजर एक बालक पर पड़ी, जो जहां शूटिंग हो रही थी, वहां खेल रहा था और शैतानियां कर रहा था। उन्हें लगा ये लड़का फिल्म के रोल के लिए बिल्कुल मुफीद है। बस फिर क्या था अशोक कुमार ने महमूद को फिल्म में रोल दे दिया।
एक समय ऐसा भी था जब लगभग हर फिल्म में महमूद के लिए एक मजबूत रोल रखा जाने लगा था। फिल्म में महमूद का किरदार अपने आप में एक कहानी होता था। कई बार वे फिल्म के हीरो से ज्यादा फीस लिया करते थे। फिल्म मैं सुंदर हूं (1971) में एक्टर विश्वजीत की फीस 2 लाख रुपए थी, जबकि उसी फिल्म के लिए महमूद को 8 लाख रुपए दिए गए थे। इसी तरह फिल्म हमजोली में भी महमूद को जितेन्द्र से ज्यादा पैसे मिले थे।

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