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ईमानदारों के शासन में,फलता – फूलता भ्रष्टाचार

वर्ष 2014 का चुनाव के बाद राष्ट्रवासी यह स्वप्न देखने लगे थे कि कांग्रेस व कांग्रेस समर्थित सरकार के सत्ता से हटते ही देश में ईमानदारों का शासन आ जाएगा और भ्रष्टाचारियों का अंत होगा।
दर्पण झूठ न बोलें, केजरीवाल के दिल्ली में बनी 49 दिन की सरकार में यह सच साबित हुआ था, कोई भी बाबू या अधिकारी यहाँ तक रेहड़ी खोमचे वालों से पैसा उगाही करने वाले भी रिश्वत माँगना तो दूर रिश्वत की बात सूनना भी उन्हें गवारा नहीं था। इंदिरा गाँधी द्वारा लगाये गये आपातकाल में जैसे ‘कानून का भय कायम हुआ था, केजरीवाल के 49 दिनों की सरकार में भी कमोवेश यहीं स्थिति थी।
लोकसभा चुनाव में मुख्य नारा व वादा था भ्रष्टाचार मुक्त भारत। देशवासी ने इसे माना और भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत प्रदान किया और दिल्ली के सातों संसदीय सीट भी भाजपा की झोली में डाल दिया।
आज दिल्लीवासी अनेक समस्याओं से परेशान है, प्रत्येक समस्या की जड़ में है रिश्वत ,भ्रष्टाचार यह कह सकते है कि चिराग तले अंधेरा है दिल्ली में।कहने को प्रदेश और केन्द्र की सरकार के साथ-साथ उपराज्यपाल भी दिल्ली वासियों के दुख दर्द को दूर करने के लिए कार्यरत है लेकिन सच्चाई यह है कि दिल्लीवासी अनाथ हो चुके है। भ्रष्टाचार चरम पर है, रिश्वत का दर दस गुणा बढ़ चुका है,चारों तरफ अराजकता का महौल है,अच्छें ,ईमानदार अधिकारी,कर्मचारी डरे-सहमें है,पता नहीं कब उन्हें आम आदमी पार्टी समर्थक घोषित कर दिया जाय,कब उन्हें भाजपा समर्थक बताकर प्रताडि़त किया जाने लगे। दर्पण झूठ न बोले, यह सब कुछ उल्टा-पुल्टा चल रहा है, प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की जा रही है और खुलेआम कीर्तिनगर पत्थर मार्केट में पॉलिश का धंधाफल-फूल रहा है, सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण ,जाम प्रदूषण का मुख्य कारण बताया जा रहा लेकिन अतिक्रमण घटने की जगह बढ़ रही है। पी-डब्लू-डी की सड़कों पर अतिक्रमण के कारण मॉनिटरिंग कमिटी ने 45 पत्थर (मार्बल) दुकान राजौरी में सील किया है।
एक फूटपाथ नहीं बचा जिस पर अतिक्रमण न हो, एम-सी-डी हो या पी-डब्ल्यू-डी की सड़के आज अतिक्रमण की चपेट में इस कदर है कि जाम की स्थिति बार-बार उत्पन्न होती है। फूटपाथ पर कब्जा कर डेटिंग-पेटिंग से लेकर ढाबा तक चल रहा लेकिन लाईसेंसिंग विभाग ,स्थानीय नेताओं को आम जनता की इन सम्स्याओं से कुछ लेना – देना नहीं है।मुख्य सचिव ने जारी सर्कुलर में निर्देश न मानने वाले अधिकारी को सचेत किया है कि दिल्ली के मामले में उपराज्पाल ही बॉस है। चलों अच्छा है कोई बॉस बनकर दिल्लीवासियों को समस्याओं से मुक्ति दिलाये। उपराज्यपाल कार्यालय को करोलबाग जोन एम-सी-डी द्वारा गलत रिर्पोट देकर गुमराह किया जा रहा है, इसके अनेक प्रमाण है। जीएसटी कमिश्नर के खिलापफ़ आरोप पत्र भ्रष्टाचार के मामलें में सीबीआई ने दाखिल किया है। भारतीय राजस्व सेवा के 1986 बैच के अधिकारी संसार चंद,पत्नी अविनाश कौर को गिरफ्रतार किया था। इसके अतिरिक्त 13 अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है।दर्पण झूठ न बोले,ईमानदारी से अगर प्रधानमंत्री कार्यालय,उपराज्यपाल दैनिक इंडिया दर्पण द्वारा समय समय पर भेजी गई पत्रें व प्रकाशित मामलों की जाँच करा ले तो हजारों करोड़ की नामी- बेनामी सम्पत्ति सामने आ जायेगा।

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