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धर्म

गुरु पूर्णिमा का महत्व, पूजन विधि और पर्व से जुड़ी मान्यताएँ

गुरु पूर्णिमा का महत्व, पूजन विधि और पर्व से जुड़ी मान्यताएँ

धर्म
धर्म ( DID NEWS) : आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा का विधान है। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हमें अपने गुरुजनों के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए। साल 2020 में गुरु पूर्णिमा 4 जुलाई को प्रातः 11.33 से लेकर 5 जुलाई सुबह 10.13 तक रहेगी। इस समयावधि में यदि विधि-विधान से गुरु का पूजन करेंगे तो निश्चित ही अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी।
गुप्त नवरात्रि आज से

गुप्त नवरात्रि आज से

धर्म
सनातन धर्मावलंबी आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी आज से ग्रीष्म आषाढ़ी नवरात्र पूजा करेंगे। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना में श्रद्धालु लीन रहेंगे। आषाढ़ी नवरात्रि में तंत्र साधना की प्रधानता के  कारण इसे गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। इस दौरान साधक दस महाविद्याओं की साधना करेंगे। ज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी के मुताबिक गुप्त नवरात्रि के दौरान 26 जून को पंचमी पूजा के साथ बेल नोती होगी। श्रद्धालु 28 जून को महाष्टमी और 29 जून को महानवमी पूजा व हवन करेंगे। उनके अनुसार गुप्त नवरात्रि किसी खास मनोकामना की पूजा के लिए तंत्र साधना का मार्ग लेने का पर्व है। अन्य नवरात्रि की तरह ही इसमें भी व्रत-पूजा, पाठ, उपवास किया जाता है। इस दौरान साधक देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के अनेक उपाय करते हैं। इसमें दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ काफी लाभदायी यह माना गया है। यह नवर
21 जून को सूर्यग्रहण

21 जून को सूर्यग्रहण

धर्म
धर्म ( DID NEWS) :  21 जून, रविवार को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह सूर्य ग्रहण 09 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा और 03 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगा। अर्थात यह सूर्यग्रहण लगभग 6 घंटे की अवधि का होने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा के आ जाने की वजह से सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंचती है और इसे ग्रहण का नाम दिया गया है। इस साल लगने वाला सूर्य ग्रहण, 'चूड़ामणि' सूर्य ग्रहण के नाम से जाना जाएगा। चूड़ामणि सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को ना ही आंशिक रूप से ढकता है और ना ही पूर्ण रूप से ही ढक पाता है। बल्कि चंद्रमा सूर्य का 99 प्रतिशत तक का हिस्सा ही ढक पाता है, जिसके कारण सूर्य की छाया एक चूड़े की तरह दिखाई पड़ती है। अर्थात सूर्य वलयाकार आकृति में दिखाई देता है और इसी को चूड़ामणि सूर्यग्रहण कहा जाता ह
सालासर बालाजी

सालासर बालाजी

धर्म
धर्म (DID NEWS) : हजारों लोगों की आस्था, श्रद्धा और विश्वास का धार्मिक स्थल सालासर बालाजी धाम भगवान हनुमानजी को समर्पित हैं। यह पवित्र धाम राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पर चुरू जिले में सुजानगढ़ के समीप सालासर नामक स्थान पर स्थित है। सालासर धाम सालासर कस्बें के मध्य में स्थित है। यहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु देश कोने-कोने से प्रतिदिन मनोकामना लेकर बालाजी के दर्शनार्थ आते हैं। चैत्र पूर्णिमा एवं आश्विन पूर्णिमा के अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है तथा यहां भव्य मेले भरते है जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सालासर में स्थित हनुमानजी को भक्तगण भक्तिभाव से बालाजी के नाम से पुकारते हैं। मंदिर के संदर्भ में प्रचलित कथानक के अनुसार माना जाता है कि बहुत समय पूर्व असोता गांव में एक खेती करते हुए एक किसान का हल किसी वस्तु से टकरा गया। वह वहीं पर रूक गया और जब किसान ने देखा
पुरी में रथ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

पुरी में रथ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

क्षेत्रीय समाचार, धर्म
क्षेत्रीय समाचार (DiD News): कोरोना वायरस महामारी की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को होने जा रही ऐतिहासिक वार्षिक जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जनहित और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इस साल रथ यात्रा की इजाजत नहीं दी जा सकती है। चीफ जस्टिस ने कहा, ''यदि हमने इस साल हमने रथ यात्रा की इजाजत दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे। महामारी के दौरान इतना बड़ा समागम नहीं हो सकता है।'' बेंच ने ओडिशा सरकार से यह भी कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य में कहीं भी यात्रा, तीर्थ या इससे जुड़े गतिविधियों की इजाजत ना दें।
सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण

धर्म
इस बार 21 जून आषाढ़ अमावस्या को लगने वाले सूर्ग्रय हण का सूतक काल माना जाएगा और यह ग्रहण लोगों के जीवन पर असर भी करेगा। ज्योतिषियों की मानें तो यह कंकण आकृति ग्रहण है। इसके साथ ही यह ग्रहण सूर्य भगवान के दिन रविवार को लग रहा है। इस ग्रहण का असर विभिन्न राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण पर सूतक काल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह सूर्य ग्रहण देश के कुछ भागों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा।21 जून को सूर्य ग्रहण दिन में 9:16 बजे शुरू होगा। इसका चरम दोपहर 12:10 बजे होगा। मोक्ष दोपहर में 3:04 बजे होगा। सूतक काल 20 जून शनिवार रात 9:15 बजे से शुरू हो जाएगा। इसी के साथ शहर के मठ-मंदिर के पट भी बंद हो जाएंगे। आपको बता देें कि ज्योतिषशास्त्री ग्रहण के ग्रहण के 12  घंटे पहले और 12 घंटे बाद तक के समय को  सूतक काल मानते हैं। ज्योतिषियों की मानें तो सूर्यग्रहण में ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले ही भो
गोवर्धन जी को समर्पित किया गया “फलों का राजा आम”

गोवर्धन जी को समर्पित किया गया “फलों का राजा आम”

धर्म
गोवर्धन जी को समर्पित किया गया फलों का राजा आम । लॉक डाउन के कारण मंदिर में आमलोगों का प्रवेश नहीं है लेकिन पुजारी व उनके सेवक रात दिन प्रभु की सेवा में लगे है । प्रकृति के रक्षक का आज का श्रृंगार प्रकृति के उपहार से किया गया ।
शांत व्यवहार लक्ष्य पाने का सबसे आसान साधन

शांत व्यवहार लक्ष्य पाने का सबसे आसान साधन

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धर्म (DiD News): हम बिना गुस्सा किए शांत क्यों नहीं रह सकते। गुस्से की बात पर गुस्सा न होना और शांत रहना ही योग है। जो व्यक्ति गुस्सा रहने की प्रवृत्ति को त्याग देगा अथवा इस पर विजय पा लेगा तो उसे दुनिया कहीं अधिक सुंदर और लुभावनी लगेगी। किसी ने कहा है कि अगर आप शांत रहने का अभ्यास करते हैं तो फिर निश्चित रूप से आप अपने लक्ष्य को पाने में कामयाब रहेंगे। अशांत रहना, गुस्सा करना, चीखना, चिल्लाना, जलना आदि केवल हमारे मन के गुब्बार को ही परिलक्षित करते हैं। दरअसल यह हमारे व्यक्तित्व या पहचान में काला धब्बा होते हैं। साथ ही हमारे चेहरे पर चिंता की रेखाएं खींच देते हैं। वहीं अगर हम शांत रहेंगे तो स्वयं अनुभव करेंगे कि हमारा जीवन कितना निर्मल हो गया है। हमें इस दुनिया की प्रत्येक वस्तु में एक अलग ही तरह की ताजगी और प्रफुल्लित प्राप्त होगी। शांत रहने की वृत्ति को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए
यज्ञोपवीत का महत्व

यज्ञोपवीत का महत्व

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धर्म (DID NEWS) : आज के युग में अकसर यह देखने को मिलता है कि माता-पिता के कहने पर युवा यज्ञोपवीत संस्कार तो करवा लेते हैं लेकिन उसे पहनते नहीं हैं या पहनते हैं तो इसे धारण करने संबंधी नियमों का पालन नहीं करते। यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि आपका यज्ञोपवीत संस्कार हो गया है तो सदा इसे धारण करें और शिखा में गांठ लगाएं, बिना शिखा और बिना यज्ञोपवीत वाला जो धार्मिक कर्म करता है, वह निष्फल हो जाते हैं। यज्ञोपवीत न होने पर द्विज को पानी तक नहीं पीना चाहिए। जब बच्चों का उपनयन संस्कार हो जाये तभी शास्त्र की आज्ञानुसार उसका अध्ययन शुरू करना चाहिए। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य यह तीनों द्विज कहलाते हैं क्योंकि यज्ञोपवीत धारण करने से उनका दूसरा जन्म होता है। पहला जन्म माता के पेट से होता है, दूसरा जन्म यज्ञोपवीत संस्कार से होता है।   धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि यज्ञोपवीत धारण करते समय
रोजाना बदरीनाथ में 1800 और केदारनाथ में 900 श्रद्धालु ही कर पाएंगे दर्शन

रोजाना बदरीनाथ में 1800 और केदारनाथ में 900 श्रद्धालु ही कर पाएंगे दर्शन

धर्म
धर्म (DID NEWS) चारधाम यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली हैं। बोर्ड अब सिर्फ सरकार के निर्देश के इंतजार में है। चारों धामों में सामाजिक दूरी का पालन कराने को दो-दो मीटर की दूरी पर गोले बना दिए गए हैं, ताकि यदि यात्रा शुरू हो, तो श्रद्धालुओं के बीच एक तय दूरी बनी रहे। दर्शन को श्रद्धालुओं की भीड़ न लगे, इसीलिए उनकी संख्या पहले ही तय कर ली गई है।यदि कोरोना काल में यात्रा शुरू होती है तो प्रति दिन बदरीनाथ धाम में 1800, केदारनाथ धाम में 900, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 450 श्रद्धालु ही दर्शन कर पाएंगे। उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड ने फिलहाल बदरीनाथ धाम में एक दिन में अधिकतम 1800 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की है।