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कामदा एकादशी

कामदा एकादशी

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चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। श्रीरामनवमी के एक दिन बाद मनाई जाने वाली इस एकादशी को समस्त सांसारिक कामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष माना जाता है। कामदा एकादशी को भगवान श्री हरि विष्णु का उत्तम व्रत कहा गया है। यह व्रत बहुत ही फलदायी है। इसे फलदा एकादशी या कामदा एकादशी भी कहा जाता है। बुरी आदतों से छुटकारा पाने के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है। इस तिथि पर व्रत करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत में सुबह स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु को गेंदे के फूल अर्पित करें। भगवान विष्णु की पूजा में दूध, तिल, फल-फूल और पंचामृत का प्रयोग करें। कामदा एकादशी का वर्णन विष्णु पुराण में किया गया है। जो मनुष्य यह व्रत रखता है, उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है। कामदा एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोज और दक्षिणा का विशेष महत्
चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है चंदायन का दुर्गा मंदिर

चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है चंदायन का दुर्गा मंदिर

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उत्तर प्रदेश के बागरपत जनपद में चंदायन गांव में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर चमत्कारों के लिए जाना जाता है। बरनावा-दाहा मार्ग पर चंदायन गांव का यह मंदिर सद्गुरु श्यामसुंदर दास महाराज के चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। सदगुरु महाराज देवी दुर्गा के अनन्य भक्त थे। उनकी कृपा से अभिभूत होकर गाजियाबाद निवासी अशोक पाल पुत्र शेरसिंह ने सदगुरु महाराज के थानस्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अगाध आस्था है। हर वर्ष चैत्र नवरात्र पर यहां आठ दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है। वहीं शारदीय नवरात्रों में भी यहां श्रद्धालु विशेष पूजा अर्चना करने आते हैं। मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को बाबा के विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।चंदायन गांव में उत्तरी छोर पर करीब एक एकड़ भूमि में स्थापित भव्य प्राचीन सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर में सच्चिदानंद सद्गुरु, मात
देवी महात्म्य

देवी महात्म्य

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धर्म/अध्यात्म (DiDNews): 'या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।' हम सब शक्तिपुंज हैं, परंतु हमारे जीवन का सबसे बड़ा भ्रम है कि हमें शक्ति की महानता का आभास नहीं होता है, क्योंकि हम अप्रत्यक्ष को देख नहीं पाते हैं। यह भ्रम जाल सर्वव्यापक है और इस जाल का आश्रय लेकर शक्ति इस जगत का कार्य व्यापार नियंत्रित करती है। इस भ्रमजाल के परे जाने की क्रिया सत्य दर्शन है। दुर्गा सप्तशती उस भ्रम जाल के परे ले जाने वाला ग्रंथ है, यहां कथा राजा सुरथ और वैश्य समाधि के माध्यम से कही गई है, जो अपना-अपना घर परिवार छोड़कर वन में मेधा ऋषि से देवी की महिमा जानने की इच्छा प्रकट करते हैं। उन्हें शक्ति के विविध रूपों का बारह अध्यायों के माध्यम से कथा एवं महिमा का ज्ञान दिया गया है। तेरहवें अध्याय में समाधि वैश्य और राजा सुरथ ने शक्ति की प्रसन्नता हेतु तीन वर्षों तक उनकी आराधना की। उनकी घोर तपस्या से शक्ति
शनि प्रदोष व्रत से शनि देवता होते हैं प्रसन्न, देते हैं आर्शावाद

शनि प्रदोष व्रत से शनि देवता होते हैं प्रसन्न, देते हैं आर्शावाद

धर्म
धर्म (DID NEWS) : प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस शनिवार को शनि प्रदोष है। शनि प्रदोष में शनि भगवान की पूजा होती है तो आइए हम आपको शनि प्रदोष की व्रत-विधि तथा महत्व के बारे में बताते हैं। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत होता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि भगवान की पूजा की जाती है। शनि प्रदोष व्रत की पूजा में काला वस्त्र, काला तिल, तेल, उड़द का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार से पूजा करने से शनि देवता प्रसन्न होते हैं और आर्शीवाद देते हैं। शनि की दशा को सुधारने के लिये यह व्रत किया जाता है। प्रदोष व्रत खास होता है इसलिए इसकी पूजा विशेष प्रकार से की जाती है। इसके लिए प्रदोष व्रत करने के लिए सबसे पहले जल्दी सुबह उठकर नहाकर साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव को जल चढ़ाकर प्रार्थना करें।
बहुत पुण्यदायी होती है पापमोचिनी एकादशी

बहुत पुण्यदायी होती है पापमोचिनी एकादशी

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 धर्म (DID NEWS) : विक्रम संवत वर्ष के अनुसार पापमोचिनी एकादशी साल की आखिरी एकादशी होती है। जो व्यक्ति जाने-अनजाने में आने वाले पापों का प्रायश्चित करना चाहते हैं उनको पापमोचिनी एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस साल 19 मार्च को पापमोचिनी एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी व्रत करने से व्रती के समस्त प्रकार के पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं। यह व्रत करने से भक्तों को बड़े से बड़े यज्ञों के समान फल की प्राप्त होता है। पापमोचिनी व्रत एकादशी बहुत खास होती है इसलिए इसकी पूजा का विशेष विधान है। इस व्रत में भगवना विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा होती है। एकादशी व्रत का प्रारम्भ दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है इसलिए दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए। नाना प्रकार के भोग-विलास की भावना त्यागकर केवल भगवान विष्णु का स्मरण ही करें। उसके बाद एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहने
भक्तों के रोग-शोक को दूर करता है शीतलाष्टमी का व्रत

भक्तों के रोग-शोक को दूर करता है शीतलाष्टमी का व्रत

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धर्म (DID NEWS) : हिन्दू धर्म में देवी पूजा का खास महत्व है। शीतलाष्टमी की पूजा भी विशेष फलदायी होती है जिसे बसौड़ा व्रत के नाम से जाना जाता है। यह पूजा होली के आठवें दिन की जाती है तो आइए हम आपको शीतलाष्टमी व्रत की पूजा-विधि तथा महत्व के बारे में बताते हैं। चैत्र महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को शीतलाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 16 मार्च पड़ रहा है। शीतलाष्टमी की खास बात यह है कि यह त्योहार होली के एक हफ्ते बाद मनाया जाता है। होली के आठवें दिन मनाए जाने वाले शीतलाष्टमी के व्रत में मां शीतला देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। शीतला अष्टमी को बसौड़ा और लसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो यह त्यौहार पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है लेकिन राजस्थान में खासतौर से बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है।
शीतलाष्टमी पर व्रत और पूजन कर माँ को करें प्रसन्न, सदैव रहेंगे स्वस्थ

शीतलाष्टमी पर व्रत और पूजन कर माँ को करें प्रसन्न, सदैव रहेंगे स्वस्थ

धर्म
धर्म (DID NEWS): शीतलाष्टमी का पर्व समूचे उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही शीतला माता के मंदिरों में भक्तों का तांता लग जाता है माता के पूजन के लिए। स्कंद पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि शीतला माता की पूजा करने से चर्म रोग पास नहीं फटकते। शीतला माता अपने हाथों में कलश, सूप, झाड़ू तथा नीम के पत्ते धारण किये हुए हैं और इनका वाहन गर्दभ है। स्कंद पुराण में शीतला माता की पूजा अर्चना का स्तोत्र शीतलाष्टक के रूप में प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान शंकर ने लोकहित में की थी।
घर में कौन-सा पौधा लगाना शुभ है या अशुभ

घर में कौन-सा पौधा लगाना शुभ है या अशुभ

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धर्म (DID NEWS) : तुलसी का पौधा: माना जाता है कि जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है वहां भगवान विष्णु का निवास होता है। वातावरण में रोग फैलाने वाले कीटाणुओं एवं हवा में पर्याप्त विभिन्न विषाणुओं की संभावना भी कम होती है। तुलसी की पत्तियों के सेवन से सर्दी-जुकाम, खाँसी आदि तरह की बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है। इसे भी पढ़ें: क्या आप जानते हैं जगन्नाथ पुरी की यह चमत्कारी बातें मनी प्लांट: मनी प्लांट एक ऐसा पौधा है जिससे घर परिवार में हमेशा लक्ष्मी रहती है, मगर काम ही लोगों को इसकी जानकारी होगी कि यह पौधा खरीदा नहीं, बल्कि चोरी करके लगाया जाता है। कांटेदार पौधे: पौधों की अपनी अलग सुंदरता होती है किंतु कुछ ऐसे भी पौधे होते हैं जिनको घर में लगाना वास्तुशास्त्र में सही नहीं माना गया, उसमे सबसे पहले वो पौधा आता है जिसको काटने या छिलने पर सफेद द्रव्य निकलते है उससे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती ह
भगवान शिव के व्यक्तित्व से सीखें जीवन

भगवान शिव के व्यक्तित्व से सीखें जीवन

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धर्म  भगवान शिव को देवों के देव महादेव ही नहीं कहा जाता बल्कि उन्हें उनके व्यक्तित्व के कई गुणों की वजह से भी सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। कभी वो सौम्य-शांत है, तो कभी वो अत्यंत क्रोधी। समुद्रमंथन से जब विष बाहर आया, तो सभी ने कदम पीछे खींच लिए थे क्योंकि विष कोई नहीं पी सकता था। ऐसे में महादेव ने स्वयं विष (हलाहल) पिया और उन्हें नीलकंठ नाम दिया गया। इस घटना से बहुत बड़ा सबक मिलता है कि हम भी जीवन में आने वाली नकरात्मक चीजों को अपने अंदर  रखकर या इससे गुजरते हुए भी जीवन की सकरात्मकता बनाए रख सकते हैं।शिव से बड़ा कोई योगी नहीं हुआ। किसी परिस्थिति से खुद को दूर रखते हुए उस पर पकड़ रखना आसान नहीं होता है। महादेव एक बार ध्यान में बैठ जाएं, तो दुनिया इधर से उधर हो जाए लेकिन उनका ध्यान कोई भंग नहीं कर सकता है। शिव का यह गुण हमेंं जीवन की चीजों पर नियंत्रण रखना सिखाता है। शिव की जीवन शैली हो या उनक
मंदिर की महिमा और इतिहास

मंदिर की महिमा और इतिहास

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धर्म ( DID NEWS) : हमारे देश में बहुत से ऐसे धार्मिक स्थल हैं जो अपने चमत्कारों व वरदानों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक है राजस्थान में शेखावाटी क्षेत्र के सीकर जिले का विश्व विख्यात प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर। यहां फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को श्याम बाबा का विशाल वार्षिक मेला भरता है जिसमें देश-विदेशों से आये करीबन 25 से 30 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं। खाटू श्याम का मेला राजस्थान के बड़े मेलों में से एक है। इस मंदिर में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की श्याम यानि कृष्ण के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर के लिए कहा जाता है कि जो भी इस मंदिर में जाता है उन्हें श्याम बाबा का नित नया रूप देखने को मिलता है। कई लोगों को तो इस विग्रह में कई बदलाव भी नजर आते हैं। कभी मोटा तो कभी दुबला। कभी हंसता हुआ तो कभी ऐसा तेज भरा कि नजरें भी नहीं टिक पातीं। श्याम बाब