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महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद अद्भुत संयोग

महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद अद्भुत संयोग

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 धर्म ( DID NEWS) : महाशिवरात्रि को इस बार 117 साल बाद फागुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को एक अद्भुत संयोग बन रहा है। शनि स्वयं की राशि मकर में है और शुक्र अपनी उच्च की राशि मीन में होंगे जो कि एक दुर्लभ योग है। उन्होंने बताया कि अगर किसी को अपना सूर्य मजबूत करना है सरकारी कामों में सफलता प्राप्त करनी है तो तांबे के लोटे में जल मिश्रित गुण से शिवलिंग का अभिषेक करें, वैवाहिक जीवन मधुर बनाने के लिए जोड़े से पति पत्नी शिवलिंग का अभिषेक करें, अगर आपकी कुंडली में मंगल पीड़ित है तो शिवलिंग का अभिषेक हल्दी मिश्रित जल से करें, अगर आपकी कुंडली में बुध की स्थिति खराब है तो शिव पार्वती की पूजा करें पूजन के बाद 7 कन्याओं को भोजन कराएं एवं जल और तुलसी पत्र चढ़ाएं, कुंडली में शुक्र को मजबूत करने के लिए दूध-दही से अभिषेक करें, कुंडली में शनि ग्रह पीड़ित है तो सरसों के तेल से अभिषेक करें, राहु ग्रह को मजबूत
शबरी जयंती

शबरी जयंती

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 धर्म ( DID NEWS) : शबरी जयंती के दिन ही शबरी को उसके भक्ति के परिणामस्वरूप मोक्ष प्राप्त हुआ था। यह पर्व मोक्ष तथा भक्ति का प्रतीक माना जाता है। शबरी जयंती हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। इस साल यह जयंती 15 फरवरी को पड़ रही है। शबरी जयंती के दिन ही शबरी को उसके भक्ति के परिणामस्वरूप मोक्ष प्राप्त हुआ था। यह पर्व मोक्ष तथा भक्ति का प्रतीक माना जाता है। शबरी जयंती हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। इस साल यह जयंती 15 फरवरी को पड़ रही है।
यदि आप आर्थिक तंगी से हैं परेशान तो करें गुरुवार का व्रत

यदि आप आर्थिक तंगी से हैं परेशान तो करें गुरुवार का व्रत

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धर्म ( DiD News) : अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं या घर में किसी लड़की की शादी नहीं हो पा रही हैं तो ऐसे में गुरुवार का व्रत फायदेमंद होगा। तो आइए हम आपको गुरुवार व्रत का नियम, महत्व तथा उद्यापन विधि के बारे में बताते हैं। मुहूर्त में शुरू करें गुरुवार का व्रत अगर आप अपनी परेशानी को कम करने के लिए गुरुवार का व्रत रखना चाहते हैं तो पौष मास को छोड़ कर किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के गुरुवार से व्रत प्रारम्भ कर सकते हैं। किसी भी शुभ काम की शुरूआत करने के लिए शुक्ल पक्ष उत्तम रहता है इसलिए गुरुवार का व्रत भी शुक्ल पक्ष से ही प्रारम्भ करें। गुरुवार व्रत की विधि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का होता है इसलिए विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए आप गुरुवार का व्रत रख सकते हैं। गुरुवार का व्रत बहुत आसान और प्रभावकारी होता है। इसके लिए बहुत कम सामान की जरूरत होती है। पूजा करने के लिए केले का पेड़,
अदृश्य भक्त करता है रोज शिव पूजा

अदृश्य भक्त करता है रोज शिव पूजा

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धर्म (DID NEWS) : घने जंगलों में ईसुरा पहाड़ की गुफा में बने इस शिवमंदिर में पट खुलते ही पुजारी को शिवलिंग का 21 मुखी, 11 मुखी 7 मुखी बेलपत्रों और चावल, फूलों से अभिषेक हुआ प्रतिदिन मिलता है। प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच बसे ईश्वरा महादेव का रहस्य वर्षों बाद भी नहीं सुलझ सका है। धार्मिक दृष्टि से भारत विचित्रताओं का देश है। भगवान शिव मंदिरों के अनेक रहस्य, किवदंतियां, कथाएं देखने सुनने को मिलती हैं। भारत में हमें शिव भगवान शिव के कई मंदिर देखने को मिलते हैं। केदारनाथ, सोमनाथ, काशी विश्‍वनाथ, अमरनाथ, लिंगराज आदि शिव मंदिरों पर रोजाना अधिक भीड़ देखने को मिलती है। प्रत्येक मंदिर अपने-अपने इतिहास के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। लेकिन भगवान शिव के कुछ ऐसे मंदिर भी है जिनके बारे में लोगों को पता नहीं होगा। आज हम हमको ऐसे ही एक मंदिर के बताने जा रहे हैं जिसकी खासियत यह है कि यहां भोलेनाथ का जला
चूहों को भोग लगाने से प्रसन्न होती है माता

चूहों को भोग लगाने से प्रसन्न होती है माता

धर्म
धर्म (DID NEWS)  भारत भर में कई अजीबो-गरीब मंदिर हैं। जहां पहुंचकर कई भक्तों की मुराद पूरी होती हैं और कई मंदिर पर अनोखे चमत्कार देखने को मिलते हैं। आज हम आपको राजस्थान के बीकानेर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर देशनोक नामक कस्बे में स्थित करणी माताजी के मंदिर के बारे में बताने जा रहें हैं। इस मंदिर की अजीब बात यह हैं कि यहां माता को प्रसन्न करने हेतु चूहों को प्रसाद खिलानी पड़ती हैं और इन चूहों की संख्या 2 हजार से अधिक बताई जाती हैं। कहा जाता है कि यह चूहे करणी माता के परिवार के सदस्य हैं और इन चूहों की झूठी प्रसाद खाने से ही माता प्रसन्न होती हैं। बताया जाता हैं कि करणी माता बीकानेर राजघराने की कुलदेवी हैं और इन्हीं के आशीर्वाद से बीकानेर और जोधपुर अस्तित्व में आए हैं।राजस्थान में करणी माता का यह मंदिर चूहों के मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर की ख्याति समूचे भारत में फैली हुई ह
मिलेगी कर्ज से मुक्ति

मिलेगी कर्ज से मुक्ति

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 धर्म ( DiD News) :  ऐसी मान्यता है कि हर व्यक्ति का भाग्य उसकी हाथों की रेखाओं में होता है और हाथों की रेखाएं कर्म के अनुसार बनती बिगड़ती हैं इसलिए हमेशा पुण्य कार्य करें क्योंकि हाथों की रेखाओं में ही आपकी किस्मत लिखी होती है। प्रातः काल उठकर सबसे पहले अपने हाथों की लकीरों को चूमकर अपने चेहरे पर फेरना चाहिए इससे बिगड़ी तकदीर बनती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। आप जिस देवी या देवता को अपना ईष्ट मानते हैं उसका नाम प्रात: काल अपनी हथेली पर दाहिने हाथ की उंगली से लिखने पर बिगड़ा हुआ काम बनने लगता है और आसानी से कर्ज से मुक्ति मिलती है। इंसान हो या कोई जानवर सबको आजादी की ख्वाहिश होती है इसलिए आप अपने कर्ज को खत्म करने के लिए पिंजरे में कैद किसी जीव- जन्तु या पक्षी को खरीदकर उसे पिंजरे से आजाद करें ऐसा करने से आपको कर्ज से मुक्ति जल्दी मिलेगी।  प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को तेल
वसंत पंचमी

वसंत पंचमी

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धर्म ( DiD News ) : वसंत पंचमी। हरीतिमा चादर में लिपटी भारत भूमि के प्राकृतिक श्रृंगार की मनोहर छटा का नव उल्लास। मां वीणा वादिनी का अवतरण दिवस। यही तो है ऋतुराज वसंत का दिन। जो चारों दिशाओं में अनुरंजित है। प्रकृति तो जैसे कलरव गान करने को आतुर है। हर मानवीय चेहरे पर सुहावने मौसम की झलक का प्रादुर्भाव। सब कुछ नया। तभी तो कहा जाता है कि वसंत ऋतुओं का राजा है। कहा जाता है कि जिसके जीवन में वसंत की कौंपलें नहीं आतीं, वह कभी नया नहीं सोच सकता। नया सृजन भी नहीं कर सकता। वसंत पंचमी को एक प्रकार से माता सरस्वती का संगीतमय अभिवादन निरूपित किया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इन राशियों वृश्चिक, मकर, कन्या और वृष पर मेहरबान रहेंगे शनिदेव

इन राशियों वृश्चिक, मकर, कन्या और वृष पर मेहरबान रहेंगे शनिदेव

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धर्म (DID TV) शनि का राशि परिवर्तन हर ढाई साल बाद होता है। यही कारण है कि कई राशियों पर शनि की ढैया शुरू होती है। किसी राशि पर शनि दोबारा 30 साल बाद  पहुंचता है। और अब ढाई साल तक स्वग्रही रहेंगे। शनि के इस राशि परिवर्तन पर शश नाम का विशेष राजयोग बना है। इससे आज से आने वाले समय में कई राशियों पर शुभ व अशुभ प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार शनि का राशियों पर यह शुभ प्रभाव मई 2020 तक रहेगा। मई के बाद शनि एक बार फिर वक्री होंगे और दिसंबर 2020 तक वक्री रहेंगे।इस राशि परिवर्तन से शनि देव मुख्य रूप से चार राशियों पर मेहरबान रहेंगे। यानी वृश्चिक, मकर, कन्या और वृष राशि के जातकों को शनि की सकारात्मक छाया रहेगी। इससे इन राशियों के जातकों को हर काम में अपेक्षा के अनुकूल शुभ फल प्राप्त होने के योग बढ़ गए हैं। वहीं पांच ऐसी राशियां हैं जिन पर शनि वक्री  रहेंगे।
15 को मकर संक्रांति

15 को मकर संक्रांति

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धर्म ( DID NEWS) दान-पुण्य का महापर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य देव 15 जनवरी रात 2 बजकर आठ मिनट पर उत्तरायण होंगे यानि सूर्य चाल बदलकर धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यही वजह है कि सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का पर्व संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को सर्वाथ सिद्धि व रवि,कुमार योग का संयोग भी रहेगा।ज्योतिषाचार्य शोनू मेल्होत्रा ने बताया कि इस बार संक्रांति का वाहन गर्दभ होगा। संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी बुधवार के दिन भर दान-पुण्य और स्नान किया जा सकेगा। मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्यदेव उत्तरायण हो जाएंगे। दिन भी बड़े होने लगेंगे। इसके साथ ही धनु मलमास भी समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। 15 जनवरी को धनु से निकलकर मकर में प्रवेश करेंगे सूर्यदेव।
जहां हैं दाढ़ी मूंछ वाले हनुमानजी

जहां हैं दाढ़ी मूंछ वाले हनुमानजी

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धर्म ( Did News ) ; सालासर बालाजी धाम को लेकर काफी कथाएं प्रचलित हैं। बताया जाता हैं कि हनुमानजी के एक भक्त मोहनदास ने काफी भक्ति और तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर हनुमानजी ने मोहनदास को दाढ़ी मूंछ में दर्शन दिए थे। भारत में श्रीराम भक्त हनुमान जी के कई चमत्कारी मंदिर हैं। जहां हनुमानजी विभिन्न रूप में विराजित हैं। लेकिन राजस्थान के चुरू जिले के सीकर नगर के समीप सालासर बालाजी का काफी प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिर हैं। यहां हनुमानजी बालाजी के रूप में विराजित हैं जो देश भर में दाढ़ी मूंछ वाले हनुमानजी के नाम से प्रसिद्ध हैं। यह देश का सम्भवतः पहला ऐसा मंदिर हैं। जहां हनुमानजी दाढ़ी मूंछ में विराजित हैं। इस मंदिर को लेकर कई मान्यता हैं। यहाँ आने वाले भक्तों का मनाना है कि सालासर बालाजी उनकी हर मुराद पूरी करते हैं। यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटाता है।