आंदोलन को जातिगत आरोपों से बचाने की कवायद तेज

भारतीय ओलिंपिक संघ ने भारतीय कुश्ती संघ के सभी पदाधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पदाधिकारियों के प्रशासनिक एवं आर्थिक कार्यों पर भी रोक लगा दी गई है। खेल मंत्रालय ने कुश्ती संघ का चुनाव 45 दिन के भीतर कराने के लिए कहा है। इसके लिए तीन सदस्यीय अस्थायी समिति गठित कर दी गई है। इस कमेटी में वूशु संघ के भूपेंद्र सिंह बाजवा, ओलंपियन निशानेबाज सुमा शिरूर और एक रिटायर्ड जज शामिल हैं। दूसरी तरफ भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली पुलिस, महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रही है।

शिकायतकर्ता पहलवानों के बयान दर्ज किए गए हैं। पहलवानों के आंदोलन को जातिगत आधार पर लगने वाले आरोपों से बचाने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। मंगलवार को भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद जंतर-मंतर पर पहुंचे थे। इनके अलावा पूर्व कांग्रेस सांसद एवं दलित नेता उदित राज भी नियमित तौर पर पहलवानों के आंदोलन में पहुंच रहे हैं। भीम आर्मी के बाद राजस्थान से गुर्जर समुदाय को साथ लाने की कोशिश हो रही है। पहलवान, यह चर्चा भी कर रहे हैं कि इस आंदोलन को जंतर मंतर से रामलीला मैदान में क्यों न शिफ्ट कर दिया जाए।

सोशल मीडिया पर राजपूत बनाम जाट की बहस छिड़ी

गौर करने की बात यह है कि जनवरी में जब यह आंदोलन हुआ था, तो पहलवानों ने किसी भी राजनीतिक पार्टी को अपने मंच पर जगह नहीं दी थी। इस बार पहलवानों ने खुद सभी दलों से जंतर-मंतर पर आने की अपील की थी। कुछ ही दिन बाद सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें चलने लगीं कि ये आंदोलन जाति विशेष के पहलवानों का है। खुद बृजभूषण शरण सिंह ने भी कह दिया कि देश के दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को उससे कोई दिक्कत नहीं है। केवल हरियाणा के और वो भी एक ही अखाड़े के पहलवानों का यौन शोषण हुआ है। इसके बाद सोशल मीडिया पर राजपूत बनाम जाट की बहस छिड़ गई है। आंदोलन को जाति विशेष का नाम दे दिया गया।

कई दूसरे समुदायों का समर्थन लेने की कोशिश

अब पहलवानों के आंदोलन को जाति भ्रम के नुकसान से बचाने का प्रयास शुरू हो गया है। जंतर-मंतर पर भीम आर्मी पहुंचने के बाद राजस्थान से गुर्जर समुदाय को साथ लाने की कोशिश हो रही है। पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता उदित राज भी कई दफा जंतर-मंतर पर आ चुके हैं। इनसे पहले कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा, पूर्व सीएम औमप्रकाश चौटाला, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कुमारी शैलजा, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक सहित कई दूसरे नेताओं ने जंतर मंतर पर पहुंचकर पहलवानों को अपना समर्थन दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता बीरेंद्र सिंह भी पहलवानों के साथ खड़े हो गए। जंतर मंतर पर उन्होंने कहा, मैं जिस भी पार्टी में हूं, महिला पहलवानों की लड़ाई में उनके साथ हूं। खेल संघों को खिलाड़ियों के द्वारा चलाया जाना चाहिए। उस पर राजनेता काबिज न हों।

आंदोलन की दिशा को भटकाने का प्रयास

जंतर मंतर पर मौजूद किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया, देखिए इस आंदोलन की दिशा को भटकाने का प्रयास हो रहा है। जब कोई पहलवान मेडल लाता है, तो देश उसका स्वागत करता है। अब इनके साथ कुछ गलत हुआ है तो इन्हें एक जाति विशेष के पहलवानों का नाम दे दिया गया। अब हम इसी भ्रम को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। किसान मोर्चा राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष हिम्मत सिंह गुर्जर से भी बातचीत चल रही है। वे भी पहलवानों को अपना समर्थन देंगे। भीम आर्मी के कार्यकर्ता यहां पहुंच रहे हैं। दलित नेता उदित राज ने भी पहलवानों को समर्थन दिया है। अन्य सामाजिक संगठनों से भी बात चल रही है। रोहतक के महम में 21 मई को खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों, किसान नेताओं व अन्य संगठनों की बैठक होगी। उसमें आंदोलन के फैलाव को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। महम चौबीसी खाप के अध्यक्ष मेहर सिंह नंबरदार की अध्यक्षता में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों की बैठक में केंद्र सरकार को बृजभूषण की गिरफ्तारी के लिए 20 मई तक का समय दिया था। अगर तब तक बृजभूषण की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आंदोलन का आगे बढ़ना तय है।

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